मेरे जीवन के सभी गुरुओं को कृतज्ञ नमन
A Message of Thanks to My Teachers and All the Great Teachers Around the World!
शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों को धन्यवाद कहने का दिन नहीं है, बल्कि उन सभी व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञ होने का अवसर है, जिन्होंने हमारे जीवन को किसी न किसी रूप में दिशा दी है। हम अक्सर शिक्षक की परिभाषा को केवल उस व्यक्ति तक सीमित कर देते हैं, जो कक्षा में खड़ा होकर हमें पढ़ाता है। लेकिन जीवन की पाठशाला इससे कहीं बड़ी है। कभी माता-पिता हमारे पहले शिक्षक बनते हैं, कभी दादा-दादी अपनी कहानियों और अनुभवों से जीवन का अर्थ समझाते हैं, कभी भाई-बहन संघर्ष में साथ खड़े होकर धैर्य सिखाते हैं और कभी कोई अनजान व्यक्ति भी अपने व्यवहार से हमें ऐसी सीख दे जाता है, जो पूरी जिंदगी हमारे साथ रहती है। मेरे लिए गुरु केवल वह नहीं है जिसने मुझे पढ़ाया, बल्कि वह भी है जिसने मुझे समझाया, संभाला, प्रेरित किया, सुधारा और आगे बढ़ने का साहस दिया। आज शिक्षक दिवस के अवसर पर मैं अपने जीवन के उन सभी गुरुओं और मार्गदर्शकों को हृदय से नमन करता हूँ, जिन्होंने मेरे व्यक्तित्व, सोच, संस्कार, पेशेवर जीवन और साहित्यिक यात्रा को किसी न किसी रूप में प्रभावित किया।
मेरे पहले गुरु — मेरे दादा-दादी, माता-पिता
मेरी जीवन-यात्रा की पहली पाठशाला मेरा परिवार रहा है। मेरे दादा-दादी ने मुझे परंपरा, संस्कार, धैर्य और जीवन के अनुभवों की वह विरासत दी, जिसे किसी किताब में नहीं पढ़ा जा सकता। उनकी कहानियों, अनुभवों और जीवन-दृष्टि ने मुझे मनुष्य और समाज को समझने की पहली दृष्टि दी। मेरे माता-पिता मेरे जीवन के सबसे बड़े शिक्षक रहे हैं। उन्होंने केवल जीवन दिया ही नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका भी सिखाया। संघर्ष में धैर्य रखना, कठिन परिस्थितियों में उम्मीद बनाए रखना, अपने पैरों पर खड़ा होना और इंसान बने रहना—ये सब मेरी शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मेरे भाई-बहनों ने भी मुझे जीवन के अनेक पाठ पढ़ाए। उनके साथ रिश्तों, सहयोग, मतभेद, प्रेम और जिम्मेदारी को समझने का अवसर मिला। जीवन में आगे बढ़ते हुए परिवार का महत्व समझना भी अपने आप में एक बड़ी शिक्षा है।
मेरे शिक्षकों को विशेष नमन
मेरे जीवन की शैक्षणिक यात्रा में कई ऐसे शिक्षक मिले, जिन्होंने केवल विषय नहीं पढ़ाए, बल्कि सोचने का तरीका भी सिखाया। मैं विशेष रूप से कृतज्ञ हूँ—
श्री ज्योतिंद्र नारायण झा,
श्री मोहम्मद अब्दुल कयूम,
श्री अखिलेश प्रसाद यादव,
श्री शिव शंकर दास,
श्री भोला नाथ झा,
डॉ. मुरलीधर मिश्रा,
श्री निहार रंजन साहू,
श्री मनोज,
श्रीमती अर्चना अरोड़ा,
श्रीमती रश्मि प्रिया
और श्री ज्ञान।
इन सभी शिक्षकों ने मेरी शिक्षा और व्यक्तित्व निर्माण में अपनी-अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किसी ने ज्ञान दिया, किसी ने अनुशासन सिखाया, किसी ने आत्मविश्वास जगाया और किसी ने मेरी कमियों की ओर मेरा ध्यान दिलाया। एक अच्छा शिक्षक हमें केवल यह नहीं बताता कि सही उत्तर क्या है; वह हमें सही प्रश्न पूछना भी सिखाता है।
पेशेवर जीवन के गुरु
शिक्षा विद्यालय और महाविद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहती। जब हम पेशेवर जीवन में प्रवेश करते हैं, तब हमें नए शिक्षक मिलते हैं—वरिष्ठ सहकर्मी, मार्गदर्शक, मित्र और वे लोग, जिनसे हम अपने काम के दौरान सीखते हैं। मेरे पेशेवर जीवन में श्री निहार रंजन साहू, श्री मनोज, श्रीमती अर्चना अरोड़ा, श्रीमती रश्मि प्रिया और श्री ज्ञान जी का विशेष योगदान रहा है। उनके मार्गदर्शन और अनुभवों ने मुझे अपने कार्यक्षेत्र में बेहतर समझ विकसित करने में मदद की। पेशेवर जीवन ने मुझे यह सिखाया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और गुरु किसी एक पद या संस्था से बंधा नहीं होता।
साहित्यिक यात्रा के मेरे मार्गदर्शक
मेरी साहित्यिक यात्रा मेरे जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। शब्दों से रिश्ता बनाना, भावनाओं को अभिव्यक्ति देना, समाज को देखना, सवाल उठाना और संवेदनाओं को साहित्य में बदलना—यह यात्रा अकेले संभव नहीं होती। इस यात्रा में जिन लोगों ने मुझे प्रोत्साहित किया, दिशा दी और मेरी साहित्यिक उपलब्धियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया, उनके प्रति मैं विशेष रूप से आभारी हूँ।
श्री महेंद्र कुमार मंडल,
डॉ. जागृति रानी,
डॉ. वीरेंद्र कुमार 'चंद्रसखी'
डॉ. रंजित कुमार 'स्नेही',
और श्री अतुल कुमार सिन्हा
का मेरी साहित्यिक यात्रा में योगदान मेरे लिए सदैव स्मरणीय रहेगा। इनका स्नेह, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मेरे लिए केवल साहित्यिक सहयोग नहीं, बल्कि मेरी रचनात्मक यात्रा की ऊर्जा रहा है। साहित्य में किसी रचनाकार की आवाज़ भले ही उसकी अपनी होती है, लेकिन उस आवाज़ को मजबूत बनाने में अनेक लोगों का योगदान छिपा होता है।
जीवन का सबसे बड़ा विद्यालय
आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो महसूस होता है कि मेरे जीवन में जितने लोग आए, वे सभी किसी न किसी रूप में मेरे शिक्षक रहे। किसी ने मुझे प्रेम करना सिखाया। किसी ने असफलता से उबरना सिखाया। किसी ने मेरी गलतियाँ दिखाईं। किसी ने आलोचना की। किसी ने मेरा उत्साह बढ़ाया। किसी ने मुश्किल समय में मेरा हाथ थामा। और किसी ने शायद अनजाने में ही मुझे जीवन का कोई ऐसा पाठ पढ़ा दिया, जिसे मैं आज तक नहीं भूल पाया। इसलिए आज मैं केवल अपने विद्यालय या महाविद्यालय के शिक्षकों को ही धन्यवाद नहीं देना चाहता। मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूँ, जिन्होंने मेरे जीवन में थोड़ा-सा भी योगदान दिया। क्योंकि जीवन में किसी का योगदान छोटा या बड़ा नहीं होता। कभी किसी का एक वाक्य पूरी जिंदगी बदल देता है। कभी किसी की एक मुस्कान मुश्किल समय में उम्मीद बन जाती है। कभी किसी की एक डाँट हमें गलत रास्ते से वापस ले आती है। और कभी किसी का विश्वास हमें वह कर गुजरने की ताकत देता है, जिसे हम स्वयं असंभव समझते थे।
दुनिया के सभी महान शिक्षकों को सलाम
आज शिक्षक दिवस पर मैं दुनिया के उन सभी शिक्षकों को नमन करता हूँ, जो हर दिन लाखों बच्चों और युवाओं के भविष्य को आकार दे रहे हैं। उन शिक्षकों को, जो सीमित संसाधनों में भी पढ़ाते हैं। उन शिक्षकों को, जो केवल पाठ्यक्रम पूरा नहीं करते, बल्कि चरित्र निर्माण करते हैं। उन शिक्षकों को, जो अपने विद्यार्थियों की सफलता में अपनी सफलता देखते हैं। और उन शिक्षकों को भी, जिन्हें शायद उनके विद्यार्थी वर्षों बाद याद करते हैं, लेकिन जिनकी दी हुई सीख जीवन भर उनके साथ रहती है। एक शिक्षक का वास्तविक प्रभाव उसकी कक्षा खत्म होने के बाद दिखाई देता है। जब उसका विद्यार्थी जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेता है, किसी कमजोर व्यक्ति की मदद करता है, सत्य के साथ खड़ा होता है और अपने समाज के लिए कुछ बेहतर करने की कोशिश करता है—तब शिक्षक की शिक्षा वास्तव में सार्थक होती है।
अंत में —
आज मैं अपने सभी शिक्षकों, अपने परिवार, अपने मार्गदर्शकों, अपने मित्रों, सहकर्मियों और उन सभी लोगों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने मेरी जीवन-यात्रा में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से योगदान दिया। दादा-दादी से मिले संस्कारों से लेकर माता-पिता के संघर्ष तक, भाई-बहनों के स्नेह से लेकर शिक्षकों के मार्गदर्शन तक, पेशेवर जीवन की सीख से लेकर साहित्यिक यात्रा के प्रोत्साहन तक— मेरे व्यक्तित्व में अनेक लोगों की छाप है। मैं जो कुछ भी हूँ, उसमें मेरा अपना प्रयास अवश्य है, लेकिन उस प्रयास को दिशा देने वाले अनगिनत हाथ भी हैं। इसलिए आज मैं केवल यह नहीं कहूँगा कि—“धन्यवाद मेरे शिक्षकों!”
बल्कि कहूँगा—“मेरे जीवन को आकार देने वाले हर उस व्यक्ति को मेरा कृतज्ञ नमन, जिसने मुझे कुछ सिखाया, कुछ समझाया, कुछ दिया या मुझे बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा दी।”
आप सभी मेरे जीवन की उस किताब के महत्वपूर्ण अध्याय हैं, जिसे मैं आज भी लिख रहा हूँ। और शायद जीवन की सबसे खूबसूरत बात यही है कि हम विद्यार्थी कभी वास्तव में विद्यार्थी होना बंद नहीं करते। हर दिन कोई नया व्यक्ति, कोई नया अनुभव और कोई नई परिस्थिति हमें कुछ न कुछ सिखाती है।
इसीलिए—
मेरे सभी गुरुओं को,
मेरे माता-पिता और परिवार को,
मेरे मार्गदर्शकों और शुभचिंतकों को,
मेरे साहित्यिक साथियों को,
और दुनिया के हर महान शिक्षक को—
शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ और शत-शत नमन।
सादर,
