Showing posts with label Article 370. Show all posts
Showing posts with label Article 370. Show all posts

Friday, 9 August 2019

I am Kashmir....

मैं जम्मू और कश्मीर हूँ कुछ लोग मुझे दुनिया का स्वर्ग कहते है तो कुछ मानवता का दोजख कहते है लेकिन मेरी खूबसूरती को देखना हो तो मुझे नजदीक से देखना पड़ेगा। वैसे मेरे अन्दर तीन अलग अलग प्रक्षेत्र है और तीनो प्रक्षेत्रो में अलग अलग समुदाय बहुतायत में है जैसे लद्दाख में बोद्ध है तो कश्मीर में इस्लाम को मानने वाले बहुतायत में, तो जम्मू क्षेत्र में हिन्दुओ का बोलबाला है। पिछले ७० सालों से मुझे भारतीय गणराज्य द्वारा प्रदत्त धारा ३७० जो मुझे भारतीय गणराज्य में रहते हुए भी मुझे स्वायतता प्रदान किये हुए था उसे भारतीय संसद द्वारा मानसून सत्र २०१९ में प्रस्ताव पारित कर हटा दिया गया। जहां पूरे देश में इसे एक त्योहार की तरह देखा जा रहा है वहीं कोई कहता है कश्मीर/घाटी के लोगो को बात नहीं सुनी। कुछ कश्मीरी हिन्दू के लिए ये बहुत संवेदना से भरा हुआ एक जीता-जागता सपना पूरे होने जैसा है। पर कुछ कश्मीरी हिन्दुओ के अन्दर अब भी अंदर की टीस जैसे कहीं अटक-सी गई लगती है जैसे ऐसा लगता है कुछ है जो अब भी चुभ सा रहा है। शायद यह कि इस समय उन्हें वहां उनके अपने कश्मीर में होना चाहिए था। उन्हें उनके अपनों की राख में झुलसती वह १९८९ का मंजर याद आ रही है जो कश्मीर में उस समय चल रहे बुरे हालात को रोकने के लिए अपनी जान तक देने के लिए तैयार थे।

कुछ मुख्य पार्टी के नेताओ के घड़ियाली आंसू इस बात का सुबूत बन गए कि इतिहास को जाहिल बनाने में इनके जैसे नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी। मैं आज भी इस असमंजस में हूं कि भारत के इतिहास में हुए विभाजन और कश्मीरी हिन्दुओं के विस्थापन की जवाबदेही किसकी है? अपनी कुर्सी सेंकने वाले पत्रकारों की,या वोट बैंक की राजनीति करने वाले नेताओं की, या स्वार्थ की चादर बिछाकर सोने वाले कुछ मतलबी कश्मीरियों की, या जिन्होंने  27 साल से अन्धकार के चादर की तरह छाये आतंकवाद के मुद्दे पर कभी प्रश्न नहीं उठाया? इसीलिए आज दुख होता है कि मेरी क्या गलती जो मुझे सजा भुगतनी पड़ी।

मैंने सब कुछ देर से समझा और जाना। गुस्सा था चिढ़ थी कि अपने ही मंदिर/मस्जिद में अपने ही लोगो के खिलाफ लोगो की साजिस के तहत अपने ही लोगो की बली दी। मुझे गुस्सा आता है कि अपने कश्मीर में ही जब मुझे पत्थर मारा गया तो मेरी चीख क्यों नहीं निकली? कितना छोटा और लाचार बना दिया गया मुझे। मेरी तड़प और मेरी चीख पर हथौड़ा मारा गया, क्योंकि मैंने कश्मीर को संजोए रखने का प्रयास किया। आखिर क्यों, मेरी क्या गलती थी?

जो भी धारा ३७० को वापस लाने के लिए इतने आतुर हैं क्या वे इसका अर्थ भी समझते है या कुछ लोगो के बहकावे में आकर सिर्फ बोलना चाहते है या वे सिर्फ कश्मीर पर राज करना चाहते हैं। वे कश्मीर से इश्क़ नहीं करते, वो इश्क वो जूनून तो हमारे ही अंदर है जो सिर्फ कश्मीर में नहीं लददाख या जम्मू प्रक्षेत्र के लोगो के आँखों में झांककर देखना पड़ेगा की क्या वे भी वही चाहते है जो घाटी के 2-४ जिलो के लोग चाहते है। शायद नहीं क्योंकि धारा ३७० हटने के बाद तो लद्दाख प्रक्षेत्र में जश्न का माहौल है वही जम्मू के लोग खुश है की वे भी अब विकास की राह में सौतेलापन नहीं झेलेंगे।

मुझे किसी से नफरत नहीं है पर ऐसा लगता है मैं वह कश्मीर नहीं जो आजादी के पहले थी। क्या कोई मुझे वही कश्मीर लौटा पायेगा? क्या कोई मेरे मुरझाए चिनार पर पानी की छींटे छिड़केगा?  मैं सरकार के इस फैसले के समर्थन में हूं क्योंकि मुझे पता है मेरे बच्चो को शिक्षा का अधिकार नहीं, मुझे साफ़ सफाई रखने वालो को वो हक नहीं जो भारतीय गणराज्य के बांकी राज्यों में उन्हें उपलब्ध है, मेरे विकास की तस्वीर बनाने वालो के पास वो अधिकार  नहीं जिसके बल पर वे मुझे खुबसूरत और बांकी देशो के साथ जोड़े रखने में सहायक हो, जनता के चुने हुए रहनुमा होने के बाद भी कुछ क्षेत्रो में विकास की बयार नहीं बह पायी क्यों नहीं, बांकी राज्यों में जो कानून है वो यहाँ भी लागू होने में रोड़ा डालते है, क्यों यहाँ के बुजुर्गो पर वह नियम लागू नहीं जो बांकी राज्यों में लागू होता है, क्यों यहाँ की बेटियों के साथ बांकी राज्यों जैसा अधिकार नहीं है।

जहाँ ७० सालों से धारा ३७० के साथ जिया है अगले कुछ साल इसके बिना जीकर देखते है क्या पता जो रोज मेरे सीने पर मेरे किसी ना किसी अपने का खून बहता है वो बंद हो जाए तो मैं फिर से दुनिया का जन्नत हो जाउंगी। फिर से मेरे यहाँ लोग सैर सपाटे के लिए आएंगे लोग खुशहाल जीवन जियेंगे यही तो मैं चाहती हूँ। मैं ही कश्मीर हूँ।

Featured Post

पटना डायरी : स्मृतियों, साहित्य और शहर की धड़कनों का दस्तावेज़

पटना डायरी : स्मृतियों, साहित्य और शहर की धड़कनों का दस्तावेज़ दिल्ली पुस्तक मेला २०२६ का पहला दिन मेरे लिए कई अर्थों में विशेष था। उसी दि...