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Tuesday, 10 January 2023

Hindi - हिंदी

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल,

बिनु निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।

अँग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन,

पै निज भाषा-ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन।

~ भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

पुरस्कारों के नाम हिन्दी में हैं

हथियारों के अंग्रेज़ी में

युद्ध की भाषा अंग्रेज़ी है

विजय की हिन्दी।

~ रघुवीर सहाय

लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है

मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिन्दी मुस्कुराती है।

~ मुनव्वर राना

ऊपर तीन अलग अलग समय के लोगों द्वारा हिंदी को परिभाषित करने की कोशिश है उसे समझने की आवश्यकता है। तभी आप हिंदी की महत्ता को समझ पायेंगे।

१४ वे शब्द जो मेरे लिए है ख़ास 

१) मां

२) जीवन

३) दुलार

४) बचपन

५) स्नेह

६) जवानी

७) प्यार

८) अभिलाषा

९) स्पर्श

१०) क्रोध

११) अपमान

१२) अलगाव

१३) मौत

१४) मिट्टी

अगर हर रोज आप खुद से और अपने लोगों से करीब दस हिंदी शब्दों का प्रयोग करके भी बात कर लें तो हमारा हिंदी के प्रति प्यार दिख जायेगा और हिंदी भाषा के साथ थोड़ा इंसाफ हो जायेगा।

मुझे पता है मैं बिहारी हूँ मेरी हिंदी के व्याकरण के हिसाब से कुछ कमजोरियां भी है और मैं उसे मानता भी हूँ क्या आप मानते है? आप नहीं मानेंगे क्योंकि आपको लगता है आपकी ही हिंदी शुद्ध है, समस्या है और मुझे लगता है आज जो हिंदी लिखी या बोली जाती है। वह हर क्षेत्र में स्थानीय तौर पर बोली जानी वाली बोलियों का सम्मिश्रण है आप बिहार के सीमांचल में जायेंगे तो आपको हिंदी में ठेठी जो अंगिका का ही अप्रभंश बोलते है उसका मिश्रण मिलेगा अगर आप भागलपुर परिक्षेत्र में होंगे तो वहां अलग है अगर आप भोजपुर में है तो वहां अलग है अगर आप मिथिला में है तो वहां अलग है अगर आप नेपाल जाएँ तो आपको अलग मिलेगी। उसी प्रकार मध्य प्रदेश में अलग अलग परिक्षेत्र के हिसाब से आपको सम्मिश्रित ही मिलेगी। अगर आप उत्तर प्रदेश की बात करे तो आपको उसमे ब्रज भाखा, बुन्देली, चंदेली आदि का भी सम्मिश्रण मिलेगा। अगर आप हरियाण जाएँ तो वहां की अलग ही हिंदी है अगर आप राजस्थान जाएँ तो वहां की हिंदी अलग है तो सवाल है हिंदी है क्या? हिंदी बोलने में और लिखने में अलग अलग हो जाती है क्योंकि बोलने में बोली का सम्मिश्रण होता है लेकिन लिखने में तो व्याकरण के प्रयोग के कारण एक ही रहता है तो इसीलिए किसी के हिंदी बोलने का मखौल उड़ाने से पहले यह सोचियेगा की क्या आप सही और शुद्ध हिंदी बोल पाते है? मेरे जैसे बिहारी जो मैं को आज भी दिल्ली में इतने साल रहने के बाद भी हम ही बोलता है मुझे पता है व्याकरण के तौर पर मैं गलत हूँ लेकिन हम का मतलब सिर्फ मेरी बात नहीं होती है पुरे कुटुंब की बात होती है।

सवाल सिर्फ अपने आप से पूछने पर ही जवाब मिल सकता है बांकी सब तो छलावा है क्योंकि अगर कोई कहता है कि आप गलत हिंदी बोल रहे है तो मानना पड़ेगा की मैं गलत बोल रहा हूँ तभी सुधार संभव है लेकिन हिंदी हार्टलैंड के नाम से मशहूर उत्तर भारत के हिंदी भाषी लोग सिर्फ अपने आपको को ही शुद्ध हिंदी बोलने वाला मानते हो तो सुधार की गुंजाईश कम रह जाती है।

हिंदी को जीवन में अपनाए तभी हिंदी की सार्थकता साबित हो पायेगी सभी भाषाओ का सम्मान करना सीखे,  खासकर हिंदी अगर आपकी मातृभाषा है तो यह बहुत जरुरी हो जाता है। ✍

धन्यवाद
शशि धर कुमार

Wednesday, 24 March 2021

बिहारियों की हिंदी

हिंदी एक भाषा है परंतु बिहारी कोई भाषा नही। बिहारियों की हिन्दी बोलने के तरीके हमेशा से सवालों के घेरे में रहे है और उसके ख़ूब मज़े भी लिए जाते रहे  हैं कि उनमें हर शब्द पुल्लिंग ही होता है मतलब उनके शब्दों में स्त्रीलिंग का उच्चारण नही होता। इसीलिए उसके शब्दो मे 'स' ही है, 'ड़' नहीं है, 'ण' का उच्चारण नहीं आता। लोग जिस बिहारी भाषा को हिन्दी समझते हैं उनसे पूछे कि आखिर हिन्दी भाषा क्या है? सभी क्षेत्रीय भाषाओं के साथ बोली जाने वाली भाषा या क्या आज शुद्ध हिंदी बोली जाती है या कुछ और।

क्या बंगाली के 'स' को 'श' कहने पर भी हिन्दी का उच्चारण उपयुक्त हिंदी का उच्चारण होता है या उसमें भी दोष होता है? या बंगाली में वही उच्चारण है? या फिर बंगाली भाषा में वही उच्चारण होता है? या बंगाली में ऐसा कोई दोष नहीं होता है। 

ये बिहार की अपनी हिंदी है जिसका अपना व्याकरण है जो कही लिखा तो नही या जिसमें लिंग का लोप हो। क्या अंग्रेज़ी वालों को किसी ने पूछा कि 'आप' और 'तुम, दोनों के लिए ही सिर्फ 'यू' ही क्यों होता है? स्पेनिश सुनकर कभी किसी ने कहा कि ये सही फ़्रेंच नहीं है या फ्रेंच सुनकर कहा हो कि यह सही स्पेनिश नही।

बिहार के लोग जिस भाषा का प्रयोग बिहार में करते हैं उसमें 'श' और 'ष' के उच्चारण की जगह 'स' बोलते हैं, ड़ को र, ण को न बोलते हैं और जिसमें लिंग का अभाव होता है। ऐसा लोग बहुतायत में बोलते है इसी वजह से ऐसा लगता है की बिहारियों को हिंदी बोलनी नहीं आती है। 

लेखनी में अगर किसी प्रकार के संवाद लिखे जाएँगे तो उसे परिष्कृत करके सुधारने से आप पात्र की मौलिकता के साथ खेल रहे होंगे। अगर पात्र बिहार का है तो उसकी भाषा से वो बिहारी लगना चाहिए वरना वो तो किसी दूर ग्रह का प्राणी मात्र लगेगा जबकि कथानक आपका बिहार की पृष्ठभूमि है। जैसे रेणु जी कथानक के पात्रों का संवाद आप सीमांचल से बाहर भी नही ले जा पाएंगे अगर ले गए तो कथा की खूशबू ही समाप्त होती हुई दिखेगी।

कहने को तो फिर दिल्ली, राजस्थान, बंगाल गुजरात, महाराष्ट्र या उत्तर पूर्व के राज्यों की हिन्दी भी गलत कही जा सकती है। जैसा कि कहा जाता है कि गरीब के कान का सोना भी पीतल कह दिया जाता है। बिहार के लोग जब 'हिन्दी' (जिसको ज्यादातर लोग हिंदी मानते है) भाषा बोलते हैं तो वो दरअसल अपनी क्षेत्रीय (भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका, ठेठी आदि) के शब्दों को हिन्दी में मिश्रण के साथ बोलते हैं।

ये एक अलग भाषा है, इसकी सुंदरता इसकी तथाकथित अशुद्धता में ही है जिससे आपको तुरंत यह ज्ञान हो जाता है कि एक बिहारी अपनी बात कह रहा है। कल्पना कीजिये अगर बिहारियों ने भी अक्षरशः वही बोलना शुरू कर दिया तो क्या आप पहचान पाएंगे कि कौन बोल रहा है। मुझे लगता है इसे अशुद्ध हिन्दी कहना मूर्खता है।

धन्यवाद।

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