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Saturday, 8 September 2018

सोशल मीडिया का मकरजाल

जिंदगी कितनी खुबसूरत होती है, जब आप किसी राजनैतिक पार्टी की ना तो तरफदारी करते है, ना ही विरोध करते है। खासकर तब जब आप ना तो कोई टीवी डिबेट देखते है और ना ही सोशल मीडिया पर दोस्तों का टाइमलाइन देखते है। और तो और किसी भी पेपर को पढने के बाद उसकी किसी बात को दिल पे ना लेते हुए उसको एक जानकारी का साधन समझते हुए पढ़ जाते है। किसी नेता को फॉलो करने के बाद भी उसके किसी बात पर कोई टिपण्णी नहीं करते है तो वाकई में लगता है जिंदगी कितनी खुबसूरत है। अपने में मग्न, क्या करना है और क्यों करना है ऐसी बातो पर बहस। जब ना तो सरकारे बदलती है ना सरकारों के काम करने का तरिका तो क्यों ना चुपचाप अपनी जिंदगी को बेहतर तरीके से जीने की कोशिश की जाए।
क्यों ना किसी गरीब की किसी प्रकार से सहायता के बारे में सोचना चाहिए। सरकारे आती जाती रहती है उसके काम करने का तरीका नहीं बदलता है, क्योंकि उनके रिसोर्स तो वही रहते है तो कैसे कोई सरकार बदल जाए कोई घोटाले करने में मस्त है फिर भी हम बुद्धिजीवी बने अपने शब्दों के जाल में एक आम आदमी को भटकाए रहते है। उसने तुम्हारे लिए क्या किया था/है हमने तो तुम्हारे लिए ये किया था/है सरकारे बदलती है सोच तो बदलती नहीं क्योंकि सोच तो वही है जिसको हम नौकरशाह कहते है। बुद्धिजीवी वही है जो कल भी वही थे आज भी वही है बस उनके शब्दों का जाल थोडा सीधा/उल्टा हो गया है।

यही एक भ्रमजाल है जिसके अन्दर हमें एक ऐसे चक्रव्यूह में डाल दिया जाता है। जिसके अन्दर हम अभिमन्यु की तरह लड़ते लड़ते आखिर में अपना दम तोड़ देते है और डालने वाले कौन होते है यही चंद राजनेता, यही चंद बुद्धिजीवी तथा यही चंद नौकरशाह नामक दुर्योधन, कृपाचार्य और कर्ण नाम के योधाओ के मध्य अभिमन्यु की तरह मारे जाते है। जिसे यह भान/खुशफहमी होता है की वह यह जाल तो तोड़ ही देगा और इसी भ्रम में इनके चक्रव्यूह में एक बार घुस गए तो हम भी उसी अभिमन्यु की तरह आखिरकार वीरगति को प्राप्त हो जाते है। और हमारी वीरगति के बाद हमें ऐसे दफनाया/जलाया जाता है जैसे हमने कोई ऐसा काम किया है जिसको आजतक किसी ने नहीं किया है। लेकिन वही जब यह युद्ध ख़त्म होता है तो हमारे बारे में किसी को पता तक नहीं होता है। आखिरकार कौन बचता है वही नौकरशाह नमक कृपाचार्य, नेता नमक दुर्योधन तथा बुद्धिजीवी नामक कर्ण के पुतले लगते है और इन्ही की किताब छपती है जिससे ये पैसे भी कमाते है और बाद में शौर्य पुरष्कार या कोई नागरिक पुरस्कार देकर इनको इतिहास में नाम दे दिया जाता है।

बेहतर है अपने में खुश रहिये अपने आस पास देखिये सबको खुश तो नहीं किया जा सकता है लेकिन सबके साथ खुश जरुर रहा जा सकता है।
धन्यवाद

Wednesday, 28 March 2018

सोशल मिडिया पर डेटा चोरी

लोग डेटा चोरी का आरोप प्रत्यारोप वाला खेल में मग्न है लेकिन जब आप 10 रुपैया कैशबैक के चक्कर मे अपना फ़ोन नंबर, ईमेल आईडी या अपना लोकेशन शेयर करते है तब शायद आप यह नही सोचते है। लेकिन चूँकि राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी ने एक दूसरे के प्रति यह बात उठाई है तो कही ना कही हम भारतीय पैदायशी राजनैतिक गुरु होने के नाते हम भी इस छींटाकशी में सम्मिलित हो जाते है।

क्या आप आज की तारीख में अगर आप स्मार्टफोन उपभोक्ता है तो सोच सकते है किसी भी एप्प को मैं अपना मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी या अपनी लोकेशन नही दूँगा तो बेहतर है आप बेसिक मोबाइल ही उपयोग कर लीजिए। क्योंकि स्मार्टफोन का मतलब साफ है आप कही ना कही आप किसी ना किसी एप्प को अपनी व्यक्तिगत जानकारी दे ही रहे है चाहे ना चाहते हुए ही सही लेकिन आप दे तो रहे है उन्हें अपने डेटाबेस में संग्रह करने के लिए फिर क्यों इतना हाय तौबा क्या इसीलिए क्योंकि आपकी अपनी राजनैतिक पार्टी आप जिसका समर्थन करते है उन्होंने अपनी विपक्षी पार्टी पर आरोप लगाया है।

आप यही उस भ्रमजाल में फंस रहे है जिसका नाम शार्क है आप कही भी जाएंगे एक शार्क से बचेंगे लेकिन दूसरी शार्क आपको निगलने के लिए तैयार बैठी है। तो आप यह मान के चलिये की आपका निगला जाना तय है तो आप किस शार्क के द्वारा निगल जाना पसंद करेंगे यह आपकी इच्छा पर निर्भर है।

आपको दुनिया मे कोई भी चीज मुफ्त में उपलब्ध नही है तो आप सोचिये की जिसका आप अपने हाथ मे रखे स्मार्टफोन से इतना ज्यादा इस्तेमाल करते है तो एक सॉफ्टवेयर अभियंता से पता कीजिये उसका मूल्य क्या हो सकता है जिसका आप बिना किसी मूल्य के उपयोग कर रहे है तो आपको खुद बखुद अंदाजा हो जाएगा कि आपको मुफ्त में क्यों मिल रहा है। अगर इतनी महंगी चीज आपको मुफ्त में मिल रही है तो सोचना आपको होगा कही आप खुद तो पैसे बना के तो नही दे रहे है। जी आप खुद उसके ग्राहक है जिसको वह पैसे के लिए कभी भी कुछ भी परोस रहा है।

जितनी मेरी अनुभव कहती है उसके हिसाब फेसबुक या कोई भी ऐसी जगह जो आपको मुफ्त में इतनी सारी सूचनाएं प्रदान करता है कही ना कही आपकी गोपनीयता को गोपनीय तरीके से किसी ना किसी प्रकार किसी और को गोपनीय तरीके से परोस रहा है।

तो सिर्फ सुरक्षा संबंधी बातो का ध्यान ना रखे अपने प्रोफाइल से हो रही गतिविधियों के प्रति सजग रहे। क्योंकि 99℅ भारतीय जो सोशल मीडिया उपयोग करते है उनको यह पता तक नही होता है कि क्या हो रहा है कैसे हो रहा है। और कई बार ऐसी बाते साझा करते है जिनके बारे में बाद में पछताते है। जिससे आपकी पसंद, नापसंद, खाना, पीना, अच्छा,खराब, आप कहाँ कहाँ जाते है सबकी जानकारी साझा करते है जिससे एक आम इंसान भी आपके प्रोफाइल को देखकर आपके बारे में 80% बाते बता सकता है।

सजग रहिये सतर्क रहिये।
जय हिंद जय भारत।

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